रिश्वत….....

Author: दिलीप /


विष्णुलोक मे आज मचा है, जाने कैसा शोर...
क्षीरजलधि मे हलचल कैसी, कोलाहल सब ओर...
शेषनाग भी मचल रहे है, हरि भी है बेचैन... 
लक्ष्मी माँ के आज दिख रहे विकल बड़े ही नैन...


समाचार ही कुछ ऐसा था, अचरज सबको भारी...
खड़ी हुई थी विष्णुलोक मे, देव जातियाँ सारी...
अब तक प्रभु को नही मानता, कल मंदिर था आया...
पहली बार ही आके उसने स्वर्ण छत्र चढ़वाया...


स्वर्ण छत्र के साथ भक्त ने पत्र एक था भेजा...
पढ़ने को व्याकुल थे नारद, मुँह को चला कलेजा...
प्रभु हरि ने वो पत्र दिया फिर, मुनि नारद के हान्थ...
प्रभु आग्या पा फिर मुनि ने, पढ़ी पत्र की बात...


मैं था तुमको नही मानता, बता रहा क्यूँ आज...
रोज़गार था नही मिल रहा, खाली खाली हान्थ...
चप्पल जूते घिस- घिस टूटे, दिखी नही पर आस...
घर मे बूढ़ी अम्मा और बहनें भी हुई उदास...


बहनों की शादी की थी, निज काँधे ज़िम्मेदारी...
माँ की हालत बिगड़ रही थी, विकट हुई बीमारी...
घर क्या घर के बर्तन तक, कर्जे की भेंट चढ़े...
और देखता था मैं ये सब, बस चुपचाप खड़े...


पर फिर जाने कैसे तेरी कृपा हुई कुछ भारी...
कुछ दिन पहले ही था मुझको, काम मिला सरकारी...
इतने दिन की दुख की बदली रिश्वत ले ले छान्टी...
ले ले कर है घूस ना जाने कितनी जेबें काटी...


रिश्वत के वो नीर भरे घन, अब थे रोज़ बरसते...
नहीं देखता अब निज घर को, रोते और बिलखते....
पर कल ही दफ़्तर मे कोई छाती पीट रहा था...
नही दे रहा था वो रिश्वत, लगता ढीठ बड़ा था....


नही हुआ जब काम तो बोला, सड़ के मर जाओगे...
दूजे की मेहनत के दाने कब तक खा पाओगे...
फिर वो उपर देख चिंघाड़ा, कलियुग घोर है आया...
अब तो तुम नीचे आ जाओ, दिखा रहे क्यूँ माया....


शाम को फिर मैं रस्ते पर ही, चबा रहा था पान...
फीका पड़ गया पान, सुनी जब पन्वाडी की तान...
बोला भैया बोल रहा सच, कुछ सालों के बाद...
पापी सब मर जाएँगे, जब जन्मेंगे भगवान...


बस तबसे ही सोच रहा क्या, मर जाऊँगा मैं भी...
पाप किए हैं मैने भी तो, सड़ जाऊँगा मैं भी...
तभी गया बाज़ार खरीदा स्वर्ण छत्र ये भारी...
चढ़ा रहा हूँ तुमको भगवन, विनती सुनो हमारी...


अभी अभी तो दो बहनों के हुए हैं पीले हान्थ...
अम्मा की बीमारी भी अब कुछ दिन की है बात...
इसीलिए ये भेंट दे रहा, इसको मत ठुकराना...
तीस वर्ष उपरांत प्रभु ही, इस धरती पे आना...

16 टिप्पणियाँ:

डॉ.भूपेन्द्र कुमार सिंह ने कहा…

Wonderful Dilip ji,bahut sunder blog,teekhe vyang ke saath ,wakai maja aagaya.
Meri or sey hardik dhanyavaad ,sneh sweekariye.
apka hi ,
dr.bhoopendra
jeevansandarbh.blogspot.com

डॉ.भूपेन्द्र कुमार सिंह ने कहा…

ek baat bhool gaya ,bahut kalatmak blog laga aapka ,bahut sunder ,badhai
dr.bhoopendra

HTF ने कहा…

अति उत्तम प्रस्तुति हार्दिक बधाईयां ।

दिलीप ने कहा…

Dhanyawad Bhoopendra ji.....

संजय भास्कर ने कहा…

kya baat hai dleep bhai lajwaab ho aap

Akhtar Khan Akela ने कहा…

jnaab saadar vnde aap shi hen naa baap bdha naa bhyya sbse bdhaa rupyya. akhtar khan akela kota rajasthan

अरुणेश मिश्र ने कहा…

और अच्छा लिखो , शुभकामनाएँ ।

दिलीप ने कहा…

Shukriya mitron...

दिलीप ने कहा…

Dhanyawad Arunesh ji...

Uma Shankar Yadav ने कहा…

ab ly akahu sir ji i m speechless bas ek baat haiki aap mein abhi tak wahi baat hain
aap ki performance dekhi hain dil khush hogaya


aur ye to GOONJ ki GOONJ hai jisko aap abhi tak aagey bada rahe hain... umeed hain aap kuch aisa karte hi rahen gey lekin aap ko kabhi kisi mod par bhi coolie ki zaroorat pade fir se ek awaz laga dena main chala aunga
jaise ki INqlaab mein aya tha waise abhi o bahut door hu

Uma Shankar Yadav ने कहा…

ek baat hai ki

Social issue hamesha uthate hain aap;
pehle hasate hain fir bada rulate hain aap;

ye desh hai veer jawano ka albelo ka mastano ka is desh ka yaro kya kehna

दिलीप ने कहा…

Uma yaar tumhare vichar padhta hun to lagta hai tumne college me kyun nhi likha....

aur haan jab bhi kuch karunga tum logo k bina nhi karunga....

सीमा सचदेव ने कहा…

आपकी रचनाएं तो समय मिलते ही पढकर टिप्पणी करुंगी लेकिन आपके टैम्प्लेट की सजावट और सुन्दरता की तारीफ़ किए बिना अगर यहां से गए तो अन्याय होगा ।

दिलीप ने कहा…

Shukriya Seema ji asha hai apko rachnayein bhi pasand aaye...

Shekhar Suman ने कहा…

bahut khub...
bahut hi achhi rachna..
mann waah kiye bina na rah saka....
mere blog par is baar..
वो लम्हें जो शायद हमें याद न हों......
jaroor aayein...

honesty project democracy ने कहा…

Kavita ki panktiyon main hi sahi lekin aaj bhrashtachar ke khilap aawaj uthane ki skht jaroorat hai,kyoki bhrashtachar aab logon ka paisa nahi khoon chus raha hai.

एक टिप्पणी भेजें