फक्र मुझे अब है कहने में, हाँ मैं धंधा करती हूँ....

Author: दिलीप /


जिस्म नुचा, इज़्ज़त है बिखरी, फिर भी लब खामोश रहे...
लाली संग चिपकी मुस्काहट, आँसू उसके बोझ तले...
सूनी सूनी माँग रही पर सेज हमेशा सजी रही...
जिस्म कुचलता रहा साथ में, रूह भी मेरी कुचल गयी...

मजबूरी में मैंने अपने सभी खजाने लुटा दिए...
जिस्म के भूखे हैवानो को हवस के साधन जुटा दिए...
जो औरत के हक की खातिर नारे रोज़ लगाते हैं...
भेष बदल कर अँधियारे में, वो भी अक्सर आते हैं...

कभी सजल नैनो से अपने पी का आँगन छोड़ा था...
इक अंजाने संग कभी आशा का धागा जोड़ा था...
पर मैं किस्मत की मारी, विश्वास के हाथों छली गयी...
एक रात मे ही बरसो की जमा कमाई चली गयी...

किसी दर्द की दवा बनी, तो कभी खिलौना बन टूटी...
कभी सुलगते अरमानों से, मैं अंगारा बन फूटी...
मेरे दामन के साए मे जाने कितने जश्न हुए...
फिर भी दिल से उफ़ न निकली न आँखो से अश्क़ गिरे...

लेकिन इक दिन ऐसा आया ममता मेरी सहमी थी...
इस बंजारी कोख से अपने इक दुखियारी जन्मी थी...
फिर सोचा ये बीज दुखों का जैसे बढ़ता जाएगा...
इन वहशी नज़रों का खंजर उसपे गड़ता जाएगा...

यही सोच ममता का आँचल खुद ही मैने तार किया...
पतझड़ मे जो कली खिली थी उसको जिंदा गाड़ दिया...
लाश जिस्म की मेरी अब भी बिस्तर पे ही सजती है...
बोझ बड़ा खलता है दिल को, फिर भी अक्सर हँसती है...

इस दोजख से दूर पली जो, वो भी क्या सुख पाती है...
कभी खुले मे कभी बंद मे इज़्ज़त लूटी जाती है...
कभी हवस होंठों से झड़ता, कभी नज़र से बहता है...
एक बेचारी लड़की का दिल, जाने क्या क्या सहता है...

कुछ अपनों की ही बाहों मे जाने से घबराती हैं...
कुछ तो सब कुछ सहते सहते घुट घुट के मर जाती हैं....
हैवानों की इस नीयत का जम कर सौदा करती हूँ....
फक्र मुझे अब है कहने में, हाँ मैं धंधा करती हूँ....

47 टिप्पणियाँ:

संजय भास्कर ने कहा…

फिर से प्रशंसनीय रचना - बधाई

संजय भास्कर ने कहा…

... बेहद प्रभावशाली

मो सम कौन ? ने कहा…

गज़ब हो दिलीप जी, गज़ब।

Virender Rawal ने कहा…

दिलीप भाई कितना अच्छा लिखते हो , सच में मैं सिर्फ यहाँ इसीलिए लिखता हूँ कि कुछ आप जैसे लोगो से कभी संपर्क बनेगा. सच में बड़ी ख़ुशी हुई . आपका एक एक भाव बहुत सच्चा हैं . मैं भी संवेदनशील मुद्दों पर लिखना चाहता हूँ पर प्यार कि संवेदना मुझ पर इतनी गहरी हैं क्योंकि अपना एक व्यक्तिगत अनुभव जिंदगी का सारा सुख छीन ले गया . फिर भी मेरे रोने धोने पर ध्यान ना दे और मेरी बधाई स्वीकारे कि आप हिंदी के एक बहुत उम्दा लेखक हो .
मेरी कविता पर आपकी टिपण्णी देखकर उधार चुकता करने के लिए आया था . पर आपकी रचनाये देखकर वो बात तो कही छूट गयी और ख़ुशी हुई कि हिंदी कि सेवा में मेरी ही तरह एक और इंजिनियर भी लगा हैं . सच में मुझे बड़ी ख़ुशी होती हैं जब अपने क्षेत्र के व्यक्ति साहित्य सेवा में दिखाई देते हैं .
virender.zte@gmail.com
http://saralkumar.blogspot.com

Shikha Deepak ने कहा…

कमाल है............कितना अच्छा लिखते हैं।

दीपक 'मशाल' ने कहा…

Dileep, bahut sundar soch, bhav aur lekhan. bahut kuchh likhena chahta hoon is kavita ki tareef me lekin kitna bhi likhoon kam hi hoga...

Indranil Bhattacharjee ........."सैल" ने कहा…

लाजवाब ... बेहतरीन ... कोई अलफ़ाज़ नहीं मेरे पास तारीफ़ के लिए ... ये रचना अपनी सानी खुद है !

Tej Pratap Singh ने कहा…

Dileep ji aap ne suru main apne baho dalen hain phir ladki ke aur phir sameta hai samaj ko saath main...jo thoda atisayokti hai par accha hai...ek bhao main rachna aur aachi hoti.mool roop se thda bhtka hui hai rachna.
wase badiya likha hai aap ne.

Amit Sharma ने कहा…

भाव जितने ह्रदय स्पर्शी है
यह चित्र उतना ही हा-हा कारी लगा भाई जी
ऑफिस में अकेला था एकदम से आपका ब्लॉग खुलते ही
आप समझ सकते है क्या हुआ

Amit Sharma ने कहा…

गजब की प्रभावशाली रचना है बधाई

अनामिका की सदाये...... ने कहा…

ब्याहने की उम्र जो आई
अनजाने से ब्याह दी गयी.
एक ही रात में इज्जत लुट गयी
ता-उम्र जिसकी खातिर कैद रही.
अगले दिन ये खबर हुई..
की एक अय्याश ने मांग भरी..
यही रह गयी इसकी,उसकी कहानी
औरत बस बद हाल रही.

दिलीप जी आपकी रचना पढ़ कर ये
पंक्तिया लिखी गयी...

राजेन्द्र मीणा 'नटखट' ने कहा…
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दिलीप ने कहा…

Tej ji aapki tippani ke uttar me kuch kehna chahunga...jo prayas maine kiya tha usme bas ek veshya ki vyatha aur fir samaaj me naariyon ki durdasha dekh kar, us veshya k hridaya ko milne wala sukoon ki kam se kam naariyon ko apmaanit karne wale haivano ko bhi wo sauda karne pe majbor kar deti hai...iska chitran kiya...agli baar aur achcha likhne ka prayas karunga....

दिलीप ने कहा…

Anamika ji bahut sundar au marmik panktiyan likhi...abhar...

राजेन्द्र मीणा 'नटखट' ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
M VERMA ने कहा…

दिलीप जी आपने अत्यंत मार्मिक रचना की है. आपकी रचनाएँ दिल को छू जाती हैं
बेहतरीन

राजेन्द्र मीणा 'नटखट' ने कहा…

आपकी रचना हर बार की तरह ...बहुत ही अच्छी है , आपकी सृजन शक्ति का कोई जवाब नहीं ....परन्तु यहाँ पर यह कविता सत्य से कुछ परे है ..या फिर यह कहा जाए तो उचित है ..की हमें सच से दूर लग रही है ......हमारे देश के देहात क्षेत्रो ..में हर परिवार गरीब ..और औरतें मजबूर होती है ...परन्तु इसका मतलब यही नहीं की ...हिम्मत हारकर यह रास्ता अपना लिया जाए ........बस यही कहना है ...बाकी रचना प्रभावशाली है ....और संवेदना से परिपूर्ण है

पं.डी.के.शर्मा"वत्स" ने कहा…

बेहतरीन्!!

दिलीप ने कहा…

Rajendra ji...ye bas ek abla ki vyatha thi ...haan shayad kuch kahin chhoota hai...bas ye keh nahi paya ki us abla ke paas koi rasta hi nahi bacha tha....bhool sweekarta hun jaldi hi sanshodhan karunga...

दिलीप ने कहा…

aur haan jo main keh nahi paya wi Anamika ji ne keh diya...

राजकुमार सोनी ने कहा…

भाई जी
सचमुच आप बहुत अच्छा लिख रहे हैं। मैं बहुत कम लोगों की प्रशंसा करता हूं... लेकिन आप सामने होते तो शायद पीठ भी थपथपाता। मेरी बधाई व शुभकामनाएं। दोस्त.. संवदेनाओं का साथ मत छोड़ना। यही आदमी को जिन्दा रखती है। आदमी को..

सुमन'मीत' ने कहा…

दिलीप जी
क्या लिखूं निशब्द हूँ .........
आँख भर आई है आखिर औरत को ही ..........
क्यों??....

Amit ने कहा…

bahut achee... aapke vichar aur shaili adbhut hai...

KALAAM-E-CHAUHAN ने कहा…

yaar dilip

vaise main thoda kanjoos wah wahee par .....

par na jane kyon aapki rachna padhkar besakhtta nikal pada waah.....

sunder nazm........

some time visit at Kalaam-e-Chauhan.blogspot.com miloonga wahee

Sonal Rastogi ने कहा…

लिखी तो कविता दी आपने पर में मन के भीतर कहानी को जन्म दे गई ...
पंक्तिया अन्दर तक हिलाने वाली है

'उदय' ने कहा…

....लाजवाब,प्रभावशाली व प्रसंशनीय रचना ... अदभुत !!!

Shekhar Kumawat ने कहा…

aaj ka sach he ye


bahtrin

bahut badhai

shekhar kumawat

हिमांशु पन्त ने कहा…

बेहद उम्दा भाव तथा सच्चे दिल से लिखी गयी रचना... बहुत खूब.. पुराना विषय मगर जटिल.. बहुत बढ़िया शब्दों मे उकेरा है दिलीप जी... बधाई स्वीकार करें..

sangeeta swarup ने कहा…

बहुत संवेदनशील रचना...औरत के इस दर्द को बहुत जीवंतता से लिखा है....उम्दा रचना..

pallavi trivedi ने कहा…

बहुत बढ़िया लिखा है...कुछ लाइन्स बहुत अच्छी लगीं!

kunwarji's ने कहा…

सुन्दरता अपने चरम पर आपके शब्दों के माध्यम से,थोड़ी सी कटु है लेकिन .......

कुंवर जी,

arvind ने कहा…

gajab kaa likhate ho dilip.tumhaare samane natmastak hun.lajabab, behad khubsurat, maarmik, satyapurn. meri subhakaamanaaye our aashrvaad tumhaare saath hain. likhate raho.tumhari rachnaao ke sahi mulyaankan ke liye mere pass sabd nahi hai. ek baat our blog ke setting me changing laao comments karane me prob aati hai.

स्वप्निल कुमार 'आतिश' ने कहा…

dilip.....

sabse pahle to is tarah ki nazm ko saflta purvak lay me bandhe rakhne ke liye badhayi...aur doosri baat ki is nazm me jo kahani gunthi hai tumne usme dank chipa hai ...padhte padhte lagta hai dank kai jagah ..behad shandar rachna

रंजना [रंजू भाटिया] ने कहा…

behtreen likhte hain aap ..bahut si panktiyaan dil ko chu gayi ...

pooja sharma ने कहा…

bahut hi dil se likhi hui lines

वन्दना ने कहा…

दिलीप जी
इस रचना के लिये तो शब्द कम है…………………औरत के जीवन के उस पहलू को छू लिया है जिसे लोग हिकारत से देखते हैं……………एक कटु सत्य को शब्दों में बाँध दिया………………और हमें नि:शब्द कर दिया।

Shekhar Suman ने कहा…

dileep ji...
mujhe abhi bhi hairaani hoti hai ki aapko itna samay kaise mil pata hai..
bahut behtareen rachna.......
yun hi likhte rahein....

Prakash Jain ने कहा…

Bahut achchi rachna hai Dilipji,

bahut sikhne milta hai aapki rachnao se..

Harshkant tripathi"Pawan" ने कहा…

Bahut achhi post. Maja aa gaya bhai padhkar.........

Vivek Rastogi ने कहा…

दिलिप जी - पहली बार आपके ब्लॉग पर आना हुआ है, पर कमाल की कविता लिखी है, क्या मर्म उतारा है अपने लेखन से, हम तो दंग रह गये, बिल्कुल ऐसा लगा कि हम खुद ही व्यथित हैं इस सबसे, जैसे ये कविता हम ही जी रहे हों।

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वैसे भी कविता तभी लिखी और समझी जा सकती हैं जब उसमें अपना मन उतार दें ।

बधाई

zeal ने कहा…

No man on earth can touch a woman's soul. They can play and knead her flesh, but they can never win a woman's heart.

Beautiful creation !....badhaii !

Divya

शिवम् मिश्रा ने कहा…

जितनी तारीफ की जाये कम ही रहेगी !! Hats Off Brother !!

SKT ने कहा…

बहुत ही बेहतरीन!! वाकई।

प्रज्ञा पाण्डेय ने कहा…

vah bahut khub .....
bahut bariki se apne bhavo ko
vykt kiya hai ...........

Incarcerated ने कहा…

i really appreciate you buddy

बेनामी ने कहा…

Apne vigat jivan ki antim,
Aagami jivan ki pratham
Tipppadi...... karne ki cheshta!
Sadhe teen shabd prati minut ki Khas typing speed hai
For a spiritual spastic like me,
It was immense
Rather too overwhelming to find that each of your creation surmounted the preceding.....

Per chance it was....

For sinful me this grace was given,
on earth to see
the ways of heaven

बेनामी ने कहा…

Dileep aaj is samay Modi ji jeet kar pehla sambodhan de rahein hain.......aur is parv ki bela mein aap bhi jaan lein ki aap apni misaal khud hain kabhi kisi ki bisaat itni badi nahin hogi ki apke bare mein tippadi /teeka kare.
Aprtim dharohar de chuke aap hindi kavita jagat ko!
Nissandeh! Aisa likhne ke baad paigambari ya diwangi jo bhi alam taaari ho jaye ....kalam tut jaya karti hai!
Aapne pa lee ahaituki snehmayi kripa bhagwati ki
,jivan ka aapke chhand to bandh gaya aur aap kalidas ho chale

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