मैं गाँधी का हूँ भक्त नही, मैं बात भगत की करता हूँ......

Author: दिलीप /


जो कुछ मैने देखा समझा पढ़ा उसके आधार पे ये कविता लिखी है, सभी के मुझसे सहमत होने की आशा नही करता, ये मेरे निजी विचार हैं...

कोई एक गाल पे वार करे, दूजा उसके सम्मुख कर दो....
तुम जीवन अपना इसी तरह, निश्चित विनाश उन्मुख कर लो...
ये बात तो तेरी सहनशक्ति, सामर्थ्य शत्रु का तोल रही...
अब युद्ध के व्यापारों मे है, इस विनम्रता का मोल नही...

निष्फल प्रयोग निज जीवन पे, इसका मैं खंडन करता हूँ...
मैं गाँधी का हूँ भक्त नही, मैं बात भगत की करता हूँ...

अपनों के सर हैं कुचल रहे, तुमको आता आक्रोश नही...
क्यू क्षीण नपुंसक भाँति खड़े, क्यूँ तुममे कोई जोश नही...
जब मर्यादा लुट जाती है, तुम अमन की बातें करते हो...
जो रक्त कभी भी उबल गया, तुम उसपे पानी मलते हो...

जिनका है अब भी मान बचा उनका आवाह्न करता हूँ...
मैं गाँधी का हूँ भक्त नही, मैं बात भगत की करता हूँ...

यदि सिंह अहिंसक हो जाए, गीदड़ भी शौर्य दिखाते हैं...
यदि गरुड़ संत सन्यासी हो, बस सर्प पनपते जाते हैं...
इस शांति अहिंसा के द्वारा अपना विनाश आरंभ हुआ...
जब थे अशोक ने शस्त्र तजे, भारत विघटन प्रारंभ हुआ...

जो भूत की कालिख हटा सके, कुछ ऐसा साधन करता हूँ...
मैं गाँधी का हूँ भक्त नही, मैं बात भगत की करता हूँ...

हर हफ्ते एक उपवास करे, ये धर्मभीरु का लक्षण है...
पैन्सठ दिन भूखे पेट रहे, यह मूक युद्ध का दर्शन है...
है यदि अहिंसा शक्तिमयी, भारत क्यूँ टूट बिखर जाता...
इन धर्म के ठेकेदारों में, इंसान कभी क्यूँ मर जाता...

यूँ जाति धर्म आधारों पे, मैं नही विभाजन करता हूँ...
मैं गाँधी का हूँ भक्त नही, मैं बात भगत की करता हूँ...

जिस आत्मकथा की पुस्तक में, जीवन पे प्रयोग समाए हो...
जिसकी आंदोलन आँधी ने, उसके ही मान भरमाये हो...
उसने जिसने बलिदानो को, आतंक तुला मे तोल दिया...
उसको कहते हो राष्ट्रपिता, ये राष्ट्र को कैसा मोल दिया...

जो शत्रु के हाथों प्राण तजे, मैं उसका वंदन करता हूँ...
मैं गाँधी का हूँ भक्त नही, मैं बात भगत की करता हूँ...

8 टिप्पणियाँ:

बेनामी ने कहा…

मैं गाँधी का हु भक्त नहीं , मैं बात भगत की करता हु
i m also a gr8 fan of Bhagat singhji thanks thanks thanks 4 this post

Unknown ने कहा…

हम भक्त गांधी के नहीं हम बात भगत सिंह जी की करते हैं।

संजय @ मो सम कौन... ने कहा…

टिप्पणी देर से कर रहा हूं, पर रोक नहीं पाया खुद को।
सौ प्रतिशत सहमत।

Mohan Singh Chauhan ने कहा…

bahut gazab dhanywad ke patra hai aap//////////

Viresh ने कहा…

आपकी कविता का भाव पसन्द आया, बहुत खूब, लिखते रहिये 1

Viresh Singh

Sanjeev Somvanshi ने कहा…

बहुत खूब जय हो विजय हो

Unknown ने कहा…

पूर्णतया सहमत हूँ
मैं गांधी का हूँ भक्त नहीं , मैं बात भगत की करता हूँ

IUC ने कहा…

Amazing lines...और बहुत अच्छे से छंदबद्ध की गयी हैं। 👏👏

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