कुछ बातें तो बस कहने सुनने मे अच्छी लगती हैं...

Author: दिलीप /

कैसी शय है यार मोहब्बत, बारिश सूखी लगती है...
धूप ज़रा ठंडी लगती है, सर्दी गर्मी लगती है...

कैसे कह दूं नाम तुम्हारा, और किसी से वाह सुनू...
कुछ ग़ज़लें तो बस सीने मे, उलझी अच्छी लगती हैं...
 
कहाँ मोहब्बत के जज़्बे को, इन आँखों से तोले हम...
कभी कभी सौ फूल नही, इक पत्ती अच्छी लगती है...

उनके लब की खामोशी का, दर्द कहाँ तक सह पाते...
हमें आज उनकी होठों से, गाली अच्छी लगती है...

बड़े करिश्मे हैं दुनिया मे, इससे बेहतर क्या होगा...
माँ के हाथों से रूखी, रोटी भी अच्छी लगती है...

तुम कहते हो हम सुनते हैं, 'अभीऔरहैजहाँ' 'सनम'...
कुछ बातें तो बस कहने सुनने मे अच्छी लगती हैं...

20 टिप्पणियाँ:

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

आपका लिखा पढ़ना भी बहुत अच्छा लगता है।

vidya ने कहा…

बहुत बहुत बढ़िया...
कैसे कह दूं नाम तुम्हारा, और किसी से वाह सुनू...
कुछ ग़ज़लें तो बस सीने मे, उलझी अच्छी लगती हैं...

this was best!!!
u write so very well...

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

उनके लब की खामोशी का, दर्द कहाँ तक सह पाते...
हमें आज उनकी होठों से, गाली अच्छी लगती है...

बहुत खूब ..अच्छी गज़ल

Aditya ने कहा…

Gurudev.. charan sparsh..
aise kaat gai har line.. ki kuch kehne ko nahi bacha..
jaanta hun kabhi aapke jaisa nahi likh paunga.. par sach mein .. abhi k liye to sabse badi khwaahish ye hi hai..

//कहाँ मोहब्बत के जज़्बे को, इन आँखों से तोले हम...
कभी कभी सौ फूल नही, इक पत्ती अच्छी लगती है...

ab aur kya kahe koi...

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
--
आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा आज के चर्चा मंच पर भी की गई है!
सूचनार्थ!

संध्या शर्मा ने कहा…

कहाँ मोहब्बत के जज़्बे को, इन आँखों से तोले हम...
कभी कभी सौ फूल नही, इक पत्ती अच्छी लगती है...

सारी बातें बिलकुल सच्ची लगती हैं... सुन्दर

अरुण कुमार निगम (mitanigoth2.blogspot.com) ने कहा…

बहुत बढ़िया, वाह !!!!

पी.सी.गोदियाल "परचेत" ने कहा…

बढ़िया प्रस्तुति !

इमरान अंसारी (عمران انصاری) ने कहा…

बढ़िया.....आखिरी शेर सबसे उम्दा..........कभी फुर्सत में हमारे ब्लॉग पर भी आयें|

Prakash Jain ने कहा…

behtareen...bahut khoob

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) ने कहा…

आज 29/01/2012 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर (सुनीता शानू जी की प्रस्तुति में) लिंक की गयी हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
धन्यवाद!

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

कहाँ मोहब्बत के जज़्बे को, इन आँखों से तोले हम...
कभी कभी सौ फूल नही, इक पत्ती अच्छी लगती है...

दिल से लिखी हर रचना अच्छी लगाती है .. बहुत खूब

anju(anu) choudhary ने कहा…

बड़े करिश्मे हैं दुनिया मे, इससे बेहतर क्या होगा...
माँ के हाथों से रूखी, रोटी भी अच्छी लगती है...

बहुत बढिया जी

Rakesh Kumar ने कहा…

बड़े करिश्मे हैं दुनिया मे, इससे बेहतर क्या होगा...
माँ के हाथों से रूखी, रोटी भी अच्छी लगती है...

kamaal ke rang aur bhav bhar diye hain
aapne apni prastuti men.maarmik aur
hridysparshi bhi.

sunita ji ki halchal ka ek anmol nageena.

prastuti ke liye aabhar.

mere blog par aapka swagat hai.

पुष्पेन्द्र वीर साहिल ने कहा…

बेहतरीन ! मुकम्मल है हर शेर !

KESHVENDRA ने कहा…

दिलीप जी, बहुत ही शानदार लगी यह गज़ल और आपकी बाकी रचनाएँ भी. आपके लेखन के लिए ढेर सारी शुभकामनाएँ.

SANJEEV RANA ने कहा…

शानदार रचना के लिए बधाई

दिलीप ने कहा…

shukriya doston...

Bhagat Singh Panthi ने कहा…

wah ustad wah! are huzoor wah dilip kahiye

apke blog par e-mail subscription widget lagane ka kast karein taki hum aapki post regular aapne email par padh sakein.

arunamali ने कहा…

aapki khi ankhi behtrin hai........

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