मुस्कुराते इक तवे पर, माँ ने है पोयी ग़ज़ल...

Author: दिलीप /

याद के पन्ने जो पलटे, तूने इक बोई ग़ज़ल...
नाम था उसमे जो तेरा, दिल में ही सोई ग़ज़ल...

चाँद कबका फेर कर मुँह, दूर है बैठा हुआ...
चाँद पर कबसे नहीं लिखी मैने कोई ग़ज़ल...

मीर, ग़ालिब, साहिरो को पूछता भी कौन, पर...
हो गये मशहूर सबने आँख से रोई ग़ज़ल...

उसको फ़ुर्सत ही नहीं थी, भूख से लड़ता रहा...
उसने तो ता-उम्र अपनी पीठ पर ढोई ग़ज़ल...

आग से जलती ज़मीं की, प्यास न देखी गयी...
आसमाँ ने आँसुओं से रात भर धोयी ग़ज़ल...

सूखे बादल, बम धमाके, भूख और बीमारियाँ...
हिंद की आँखों के सूनेपन मे ही खोई ग़ज़ल...

चंद सिक्कों की रगड़ से, आग कुछ पैदा हुई...
मुस्कुराते इक तवे पर, माँ ने है पोयी ग़ज़ल...

20 टिप्पणियाँ:

***Punam*** ने कहा…

"उसको फ़ुर्सत ही नहीं थी, भूख से लड़ता रहा...
उसने तो ता-उम्र अपनी पीठ पर ढोई ग़ज़ल..."

bahut khoob.....

इमरान अंसारी (عمران انصاری) ने कहा…

सुभानाल्लाह.....हर शेर बेहतरीन.....दाद कबूल करें।

शारदा अरोरा ने कहा…

khoobsoorat ...

vidya ने कहा…

उसको फ़ुर्सत ही नहीं थी, भूख से लड़ता रहा...
उसने तो ता-उम्र अपनी पीठ पर ढोई ग़ज़ल...

वाह...
हर शेर खूबसूरत..
लाजवाब.

संजय भास्कर ने कहा…

खुबसूरत खुबसूरत खुबसूरत हर शेर खूबसूरत..

kamlesh joshi ने कहा…

Awesome...

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

सच कहा, गजल ऐसे ही नहीं बनती है..

Reena Maurya ने कहा…

बहुत ही सुन्दर ,बेहतरीन गजल.....

वन्दना ने कहा…

बेहद खूबसूरत

Prakash Jain ने कहा…

Behtareen

Raj Kumar Kushwaha ने कहा…

बेहतरीन गजल.....

Rahul ने कहा…

आग से जलती ज़मीं की, प्यास न देखी गयी...
आसमाँ ने आँसुओं से रात भर धोयी ग़ज़ल...

bahut sunder rachna

दिगम्बर नासवा ने कहा…

लाजवाब शेर हाँ सभी आपकी इस गज़ल के ...

aruna mali ने कहा…

bhot khuub har ek shabd me he gajal.......

सदा ने कहा…

आग से जलती ज़मीं की, प्यास न देखी गयी...
आसमाँ ने आँसुओं से रात भर धोयी ग़ज़ल...

सूखे बादल, बम धमाके, भूख और बीमारियाँ...
हिंद की आँखों के सूनेपन मे ही खोई ग़ज़ल..
वाह ...बहुत खूब ।

Rahul ने कहा…

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Smart Indian - स्मार्ट इंडियन ने कहा…

बहुत खूबसूरत रचना!

Rajesh Kumari ने कहा…

आग से जलती ज़मीं की, प्यास न देखी गयी...
आसमाँ ने आँसुओं से रात भर धोयी ग़ज़ल...
vaah vaah daad kubool kijiye bahut bahut bahut pasand aai ghazal ek ek ashaar kamaal kai hai.

abhi ने कहा…

बेहतरीन गज़ल!!

मनोज हर्ष ने कहा…

बेहतरीन

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