भूख अक्सर दौड़ती देखी है मैने...

Author: दिलीप /

रेल की पटरी, सड़क, फुटपाथ पर भी, भूख अक्सर दौड़ती देखी है मैने...
बंदगी, अच्छाइयाँ, ईमान जैसी, नीयतें दम तोड़ती देखी हैं मैने...

वो लकीरें जिनके जालों मे कहीं पर, क़ैद है किस्मत बदलते हिंद की, कल..
चाय की हल्की नमी की चाहतों मे, कुल्हड़ों को फोड़ती देखी हैं मैने...

इस चमकते हिंद के महलों के नीचे, बाँध बच्चा पीठ पर इक माँ अभागी...
एक या दो जून की रोटी की खातिर, पत्थरों को तोड़ती देखी है मैने...

क़र्ज़ भी, बेटी भी और बेशर्म बादल, साथ सूखी धरतियों का गम समेटे...
पेड़ तक पहुँची नहीं जब वो, हथेली, रस्सियाँ दो जोड़ती देखी है मैने...

महफ़िलों मे कर रहे थे वो जिरह और, औरतों के हक की खातिर लड़ रहे थे...
उस ही आदम जात की वहशी निगाहें, इज़्ज़तों को तोलती देखी हैं मैने...

भीड़ का है मुल्क़, हैं सब भेड़ जैसे, हाँक दो जिस ओर सारे चल पड़ेंगे...
इस जवानी की रगों मे बस नशा है, रूह हर इक खोखली देखी है मैने...

जात, ये मज़हब, सियासी खेल सारे, रिश्तों मे इंसानियत सब खा चुके हैं...
खून से डूबी हुई कोई हथेली, इक हथेली छोड़ती देखी है मैने...

धैर्य है, न द्रौपदी का चीर है ये, ये बढ़ेगा, छोर भी इसका मगर है...
भूख वो भूकंप है जब तेज आया, कुर्सियाँ भी डोलती देखी हैं मैने...

कब तलक रोते रहोगे इस तरह तुम, क्या बदलने के लिए कुछ भी करोगे...
है अगर हिम्मत तो कुछ आगे बढ़ो 'दिल', बस कलम ही बोलती देखी है मैने.....
Dil ki kalam se...

17 टिप्पणियाँ:

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

भूख पर लिखी बेहद मार्मिक प्रस्तुति

kshama ने कहा…

Badaa gazab likha hai aapne!

Prakash Jain ने कहा…

Hats off....It's a privilege to read ur writing...

Behtareen...aapko padhna saubhagya hai hamara...

Benamoon prastuti...

vidya ने कहा…

बहुत बहुत बढ़िया...
बेहतरीन रचना के लिए बधाई.

पद्म सिंह ने कहा…

भीड़ का है मुल्क़, हैं सब भेड़ जैसे, हाँक दो जिस ओर सारे चल पड़ेंगे...
इस जवानी की रगों मे बस नशा है, रूह हर इक खोखली देखी है मैने..

एक एक शे'र नायाब... बेशकीमती,,,,, आपके ब्लॉग पर आकर बहुत अच्छा लगा ... बहुत बहुत अच्छा

Padm Singh ने कहा…

दोबारा अद्भुद लिखने की इच्छा है... अनुपम !!!!

shikha varshney ने कहा…

दिल की कलम से लिखी दिल तक पहुंची है.

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

कितने गहरे घाव लगे हैं,
सहजीवन को देश मेरे..

वन्दना ने कहा…

दिल से निकली वेदना दिल तक पहुंच रही है…………सच्चाई की तस्वीर भयावह ही होती है।

Patali-The-Village ने कहा…

हकीकत को बयां करती सुन्दर रचना| धन्यवाद्|

शिवम् मिश्रा ने कहा…

इस पोस्ट के लिए आपका बहुत बहुत आभार - आपकी पोस्ट को शामिल किया गया है 'ब्लॉग बुलेटिन' पर - पधारें - और डालें एक नज़र - मुस्कराते - हँसते बीते २०१२ - ब्लॉग बुलेटिन

संजय भास्कर ने कहा…

नव वर्ष पर सार्थक रचना
आप को भी सपरिवार नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनायें !

शुभकामनओं के साथ
संजय भास्कर

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

नववर्ष की हार्दिक मंगलकामनाओं के आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि-
आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल बुधवार के चर्चा मंच पर भी होगी!

S.M.HABIB (Sanjay Mishra 'Habib') ने कहा…

बहुत उम्दा...सादर बधाई

Milind Phanse ने कहा…

बहूत खूब! क्या लिखा है!

Chandan Singh ने कहा…

हकीकत को बयां करती सुन्दर रचना| धन्यवाद्|
आप को सपरिवार नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनायें !

Sanju ने कहा…

सार्थक प्रस्तुतिकरण है।

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