सजी हुई है महफ़िल' यादें नाच रही हैं सीने मे...

Author: दिलीप /

दरवाजे थोड़ा तो खोलो, दिल चौखट पर पड़ा वहाँ...
उसपर भी कहती हो मुझसे क्या मुश्किल है जीने मे...

बंद हुई खिड़की पर अब भी बारिश देती है दस्तक...
क्यूँ खोलूं बूँदों से उसकी, आग लगेगी सीने मे....

पीने को तब तक पीते हैं जब तक तुम जाओ...
नशे मे भी ना दिखो अगर, तो मज़ा कहाँ है पीने मे...

मेरी मुश्किल और मुफ़लिसी, क्या समझेंगे लोग यहाँ...
ख़ुदग़रजी की इस दुनिया मे, प्यार कहाँ है सीने मे...

अपनी यादों से कह दो, हो और मेहेरबाँ शेरों पर...
चुभते हैं पर अब भी थोड़ा, कम चुभते हैं सीने मे...

बाहर चाहे कितना ही तन्हा दिखता हूँ मैं तुमको...
सजी हुई है महफ़िल' यादें नाच रही हैं सीने मे

17 टिप्पणियाँ:

Sunil Kumar ने कहा…

बाहर चाहे कितना ही तन्हा दिखता हूँ मैं तुमको...
सजी हुई है महफ़िल' यादें नाच रही हैं सीने मे
बहुत खूब .....बहुत सुंदर

Neeraj Dwivedi ने कहा…

waah sir ji ..

Prakash Jain ने कहा…

अपनी यादों से कह दो, हो और मेहेरबाँ शेरों पर...
चुभते हैं पर अब भी थोड़ा, कम चुभते हैं सीने मे...

बाहर चाहे कितना ही तन्हा दिखता हूँ मैं तुमको...
सजी हुई है महफ़िल' यादें नाच रही हैं सीने मे

adbhut...behtareen....
www.poeticprakash.com

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

अहा, आनन्द आ गया, यादें ऐसे ही बमचक मचाती हैं मन में।

somali ने कहा…

अपनी यादों से कह दो, हो और मेहेरबाँ शेरों पर...
चुभते हैं पर अब भी थोड़ा, कम चुभते हैं सीने मे...

बाहर चाहे कितना ही तन्हा दिखता हूँ मैं तुमको...
सजी हुई है महफ़िल' यादें नाच रही हैं सीने मे

bahut khob sir

vidya ने कहा…

वाह वाह...
ख़ुदग़रजी की इस दुनिया मे, प्यार कहाँ है सीने मे...
बेहतरीन...

इमरान अंसारी ने कहा…

मेरी मुश्किल और मुफ़लिसी, क्या समझेंगे लोग यहाँ...
ख़ुदग़रजी की इस दुनिया मे, प्यार कहाँ है सीने मे...

बहुत उम्दा और खुबसूरत शेर.....दाद कबूल करें|

hardeep rana ने कहा…

"अपनी यादों से कह दो, हो और मेहेरबाँ शेरों पर...
चुभते हैं पर अब भी थोड़ा, कम चुभते हैं सीने मे..."

क्या ग़जब ढाया है चन्द शब्दों ने तेरे ...
वो चुभन सहने की तलब उठी है मेरे भी सिने में....

कुँवर जी,

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

बहुत बढ़िया!
लोहड़ी पर्व की बधाई और शुभकामनाएँ!

***Punam*** ने कहा…

पीने को तब तक पीते हैं जब तक तुम न आ जाओ...
नशे मे भी ना दिखो अगर, तो मज़ा कहाँ है पीने मे...


अपनी यादों से कह दो, हो और मेहेरबाँ शेरों पर...
चुभते हैं पर अब भी थोड़ा, कम चुभते हैं सीने मे...

kya sher hain......
khoobsoorat...

शिवम् मिश्रा ने कहा…

इस पोस्ट के लिए आपका बहुत बहुत आभार - आपकी पोस्ट को शामिल किया गया है 'ब्लॉग बुलेटिन' पर - पधारें - और डालें एक नज़र - लोहडी़ और मकर सक्रांति की हार्दिक बधाइयाँ और शुभकामनाये - ब्लॉग बुलेटिन

अनुपमा त्रिपाठी... ने कहा…

कल 14/1/2012को आपकी पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
धन्यवाद!

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) ने कहा…

बहुत ही बढ़िया सर!


सादर

Anand Dwivedi ने कहा…

अपनी यादों से कह दो, हो और मेहेरबाँ शेरों पर...
चुभते हैं पर अब भी थोड़ा, कम चुभते हैं सीने मे...
.....
वाह क्या गज़ल कहि है दिलीप जी बहुत खूब !

अनामिका की सदायें ...... ने कहा…

BEHTAREEN GAZEL.

Aditya ने कहा…

Sirji pranaam.. :)

//अपनी यादों से कह दो, हो और मेहेरबाँ शेरों पर...
चुभते हैं पर अब भी थोड़ा, कम चुभते हैं सीने मे...

bawaal ekdum.. bawaal..

Pallavi saxena ने कहा…


पीने को तब तक पीते हैं जब तक तुम न आ जाओ...
नशे मे भी ना दिखो अगर, तो मज़ा कहाँ है पीने मे...

मेरी मुश्किल और मुफ़लिसी, क्या समझेंगे लोग यहाँ...
ख़ुदग़रजी की इस दुनिया मे, प्यार कहाँ है सीने मे...

वाह!!! कमाल का लिखा है आपने बहुत खूब शायद यही है सच्चा इश्क...

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