तो चिढन सी थी की मेरे हिस्से का प्यार कम हो गया....
माँ की गोद मुझसे छिन किसी और को मिल गयी....
पिताजी की नज़रो मे कोई और चेहरा चढ़ गया....
नाराज़ था मैं उससे क्यूँ आई वो...
छिन गया था मुझसे मेरा संसार....
मौका मिलते ही उसे परेशान करता था
खींचता था उसके बाल....
पर कभी उसकी प्यारी सूरत देखकर प्यार आ जाता था
तो मुँह सड़ाकर चला जाता था....
अपने कमरे से छिप्कर उसे मुँह चिढ़ाता था....
पर वो सच मे बहुत प्यारी थी...
इसीलिए सबकी दुलारी थी....
उसकी आँखें मुझे देख कर खिल उठती थी....
टुक टुक कर मुझे ही देखती रहती थी....
शायद वो मुझसे कुछ कहना चाहती थी....
मेरी भी गोद मे आकर रहना चाहती थी....
फिर मेरे भी हाथ उसे गोद मे लेने को मचलने लगे....
थोड़ा थोड़ा उसकी बातें समझने लगे....
मेरे मन का युद्ध समाप्त हुआ....
जब उसने अपनी छोटी सी उंगलियो से मुझे छुआ....
अब मैं अपने खिलौने उसके साथ खेलने लगा....
उसकी गुड़िया के हाथ और आँखें तोड़ने लगा...
टूटी चूड़ियाँ फटे हुए काग़ज़ जो भी थे....
मेरे बचपन के सारे ख़ज़ाने अब उसके भी थे....
अब वो धीरे धीरे मेरी उंगली पकड़ कर चलने लगी....
मेरे हान्थो से चॉक्लेट टॉफियाँ छीनने लगी....
फिर एक दौर आया जब हम बिछड़े....
उसकी एहमियत अब ज़्यादा समझ मे आने लगी....
सोते मे उसकी याद तकिया भिगाने लगी......
फिर दुबारा मिले लड़े झगड़े साथ रहे....
ज़िंदगी के सबसे प्यारे लम्हे बिताए....
साथ रोए, साथ खाए....
आज मैं यहा हूँ दूर उससे....
आँखों मे उसका चेहरा अब भी सताता है....
दिल रह रह कर उसी के पास चला जाता है....
पहले उसके हर जन्मदिन पर साथ थे....
अब वो हर साल मेरे बिना बड़ी होती है....
दिल मे इक टीस सी होती है....
एक दिन वो कहीं और चली जाएगी....
लगता है भाग दौड़ मे कट वो भी घड़ी जाएगी....
और मैं फिर यही आ जाऊँगा....
अपनी ज़िंदगी मे खो जाऊँगा....
वो पल जो उसके साथ थे....वो भी सताएँगे....
और पल जो उसके बिना कटे वो भी रुलाएँगे....
कभी कह नही पाया पर मैं उससे बहुत प्यार करता हूँ....
हमेशा उससे मिलने की घड़ी का इंतज़ार करता हूँ....
वो तब भी मेरे लिए गुड़िया थी....
अब भी मेरी दुलारी है....
कभी कह नही पाया पर बहन....
पर तू मुझे जान से प्यारी है......


34 टिप्पणियाँ:
ऐसा ही होता है ..बरसो बाद मेरे भाई ने जब कहा इस बार राखी पर आजाओ , तुम्हारे बिना अच्छा नहीं लगता .. तबसे आँखों की कोरें गीली सी रहती है ..
अगर नहीं कहा तो कह दो बहन यही सुनना चाहती होगी
Padhte,padhte ankhen nam ho gayin..
आपकी यह रचना मजेदार है.
अब अगली का इंतज़ार है...
जिन्दगी को माने एक बगिया जिसमे एहसास के लमहो से सजी क्यारी है बहना हमारी भूत भविष्य वर्तमान तीनो मे बहुत प्यारी है। बहुत सुन्दर रचना दिलीप भाई। आजकल अब दूर रहने वाली कोई बात ही नही रह गई है। अन्तरजाल की दुनिया न्यारी है सबको पास बना देती है।
दिलीप भाई ,
क्या कहूं ...बरसों पहले ही अपनी दीदी को अचानक ही खो बैठा । सबने कहा कि अच्छे लोगों की जरूरत भगवान को ज्यादा होती है ...मां पिछले बरस चल बसीं सबने कहा भगवान को अच्छे लोगों की ज्यादा जरूरत होती है ....मगर दिल जानता है कि जरूरत उन्हें ज्यादा होती है .जिनके पास वो नहीं होते ......आपने रुला दिया ...।
भाई बहन का प्यार होता ही ऐसा है.
दिलीप भाई, बहनों के बारें में कुछ भी पढता हूँ तो दिल भर आता है...मेरी बहने ही मेरे लिए मेरी दुनिया हैं....
बहुत बहुत अच्छी है ये कविता
आँखें नम हैं..बहुत हृदयस्पर्शी प्रस्तुति...
बहुत सुन्दर, हृदयस्पर्शी कविता
बधाई
दिलीप जी,
संवेदनशील प्रस्तुती!
athaah prem bahan ke liye....
bhavnaao ko sahi shabd mile hai
kunwar ji,
’कभी कोई आया था ज़िंदगी मे...
तो चिढन सी थी की मेरे हिस्से का प्यार कम हो गया..."
अब लगता होगा कि एक प्यार करने वाला आत्मीय और बढ़ गया था।
और दिलीप, कह देना ही सब कुछ नहीं है न?
बहुत सुन्दर कविता,
बहुत भावपूर्ण लिखा है भाई ....
बहुत सुंदर भावना और स्पष्ट प्रदर्शन .
बधाई .
भाई-बहिन का ये प्यार है ही ऐसा दोस्त.. फिर बढ़िया काम..
बहुत सुन्दर भाव।
बहुत हृदयस्पर्शी और भावपूर्ण रचना
....बेहतरीन,बधाई!!!
बहुत बढ़िया...भावना प्रधान रचना!
बहुत सहजता से भावोंको पिरोया है...सुन्दर अभिव्यक्ति
ह्रदय स्पर्शी ... बहनें तो ऐसी ही होती हैं ... बहुत अच्छी रक्न्हा .. जैसे बचपन दोहरा रहे हों ...
बहुत सुन्दर कविता,बहनें तो ऐसी ही होती हैं|बधाई!
bahut khub likha hain, aapke blog par pahlibaar aana huaa aur rula diya aapne..
behan ke liye bahut dher sara pyar dikha is nazm me ...bahut badhiya rachna bhai ..
बहुत ही भावभीनी दिल को छू लेने वाली रचना……………ये रिश्ता ऐसा ही होता है…………एक अनमोल रिश्ता।
आपके भाव मन को झंकृत कर गये...
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भविष्य बताने वाली घोड़ी।
खेतों में लहराएँगी ब्लॉग की फसलें।
पहले उसके हर जन्मदिन पर साथ थे....
अब वो हर साल मेरे बिना बड़ी होती है....
बहुत कम भाई होते हैं ,जो अपनी भावनाओं को इतने अच्छे से शब्दों में बाँध पाते हैं...एक और सुन्दर नज़्म
Dilip ji, aapki kavita read karke mujhey merey bhai ki yaad aa gayi jo abhi 20 din pehley is sansar se chala gaya , vo bhi bilkul aisa hi tha, mujhey chhota tha par bikul aisa hi tha, mujhey laga ki aapki kavita ke madyam se vo hi mujh sey yah kah reha hai, aapki kavita pardtey pardtey aankho se aansu nikal aayey , mujh se yah kahney wala na janey kis desh chala gaya
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ये कविता एक तोहफे जैसी है आपकी बहन के लिए.....
bhwnaon ki sundar prastuti.
madhu,mujhe apane bhai ki bhut yaad ai ,rone kodil hua per rone ke liye bhi samay nahi hai,sach me jindagi ke dour ne hame apno se kitana alag ker diya hai.
dil ko choo liya apne
सच भाई बहन का रिश्ता बहुत प्यारा होता है , आज जब मै अपने भाई से दूर हूँ तब मुझे उसकी हर शैतानी , लडाई याद आती है , काश वो समय फिर से वापस आ जाय ।
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